सेब किसानों को तोहफा दे रही हिमाचल सरकार, इतनी बढ़ेगी कमाई |

सेब की खेती करने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार आधुनिक कोल्ड स्टोरेज का निर्माण करने किसानों को ख़ास सुविधाएं देने वाली है. ताकि किसानों की फसल सुरक्षित रहे और किसानों को ज्यादा मुनाफा हासिल हो सके|हिमाचल प्रदेश में सेब किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार करोड़ों रुपये की परियोजना शुरू करने वाली है | इस परियोजना की लागत 500 करोड़ रुपये की होगी. राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसकी जानकारी दी. सेब की बागबानी में जुटे एक नौजवान दक्ष चौहान विस्तार से बताते हैं, “सेब की खेती ही हमारी जीविका का साधन है।”  वो कहते हैं,  “मेरे दादा के समय में इस पूरे क्षेत्र के लोग बहुत ग़रीब थे। सेब की खेती ने हमारा जीवन सुधार दिया।”लगभग सौ साल पहले, जब से हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती शुरू की गई, तब से राज्य की अर्थव्यवस्था सेब पर निर्भर है। राज्य में खेती की कुल ज़मीन 6.15 लाख हेक्टेयर है और उसमें से लगभग दो लाख में फल के बागान हैं । इसमें से लगभग 1.15 हेक्टेयर ज़मीन में सेब की खेती होती है ।

लेकिन समय के साथ सेब की फ़सल को कई चनौतियों का सामना करना पड़ा। ये चुनौतियां थीं मौसम का पूर्वानुमान के मुताबिक न होना, कम फ़सल देने वाले पुराने बाग, खेती के पारंपरिक तरीके और उचित सिंचाई सुविधाओं का अभाव जिनके कारण कृषि से होने वाली कमाई कम थी, ख़ास तौर पर कम ज़मीन पर खेती करने वाले छोटे किसानों के लिए। ग्राहक की पसंद भी बदल रही है और उसका झुकाव आयात किए जाने वाली किस्मों की तरफ़ है जिससे छोटे किसान साल दर साल नुकसान के चक्कर में फंस गए हैं ।

वर्ष 2016 में हिमाचल प्रदेश में फिर से उस पथ-प्रदर्शक वाली ऊर्जा सुलगी जिससे सेब पहली बार हरे-भरे पहाड़ों में आए थे। उसी उर्जा ने राज्य को असल में भारत में सेब की खेती में अग्रणी बना दिया था ।

विश्व बैंक की हिमाचल प्रदेश बागबानी विकास प्रॉजेक्ट की मदद से राज्य ने किसानों के फल उगाने के तरीके को पूरी तरह बदलने का काम किया है सेब की खेती करने वाले किसानों के लिए राज्य सरकार आधुनिक कोल्ड स्टोरेज का निर्माण करने किसानों को ख़ास सुविधाएं देने वाली है. ताकि किसानों की फसल सुरक्षित रहे और किसानों को ज्यादा मुनाफा हासिल हो सके कोल्ड स्टोरेज से सेब के किसानों को बहुत सहायता मिलेगी|इस प्रॉजेक्ट के तहत छह ज़िलों में कुल 12,400 किसानों की सदस्यता वाली 30 किसान उत्पादक कंपनियों को स्थापित करने में मदद की गई । सदस्यों में से 27 फ़ीसदी महिलाएँ थीं । इन कंपनियों ने सेब की ग्रेडिंग यानी उसके आकार और गुणवत्ता के मुताबिक छंटनी और फिर उसकी पैकेजिंग, फ्ऱूट प्रोसेसिंग, व्यापार और कोल्ड स्टोरेज में भंडारण जैसे कार्यों को अंजाम दिया ।

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