सरकार ने पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने और छोटे किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से एक नई योजना शुरू की है, जिसके तहत बैलों से खेती करने वाले किसानों को 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करना और किसानों को महंगे ईंधन से चलने वाले ट्रैक्टरों के खर्च से राहत देना है। खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह योजना उनकी खेती की लागत कम करने और जैविक खेती को बढ़ावा देने में मददगार साबित होगी।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को स्थानीय कृषि विभाग में पंजीकरण कराना होगा। इसके लिए आधार कार्ड, जमीन के दस्तावेज और बैलों से खेती करने का प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक होगा। पात्र किसानों के बैंक खातों में यह सहायता राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी, जिससे किसानों को सीधे आर्थिक मदद मिलेगी।
यह पहल सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा देगी। बैलों से हल चलाने से खेतों की मिट्टी प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम होता है, जिससे खेती अधिक टिकाऊ बनती है। इसके अलावा, पारंपरिक खेती के तरीकों को पुनर्जीवित करने से गांवों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सरकार की इस पहल से न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि जैविक और सतत कृषि के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। किसानों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए जल्द से जल्द पंजीकरण कराने की सलाह दी जा रही है।
