ओडिशा के पुरी ज़िले के सत्यबादी तहसील में बसा कबीराजपुर गाँव अपनी हरियाली, खेत-खलिहानों और मिट्टी की सुगंध के लिए जाना जाता है। लगभग 837 लोगों की आबादी वाला यह गाँव पूरी तरह खेती पर निर्भर है। इसी गाँव में रहते हैं रंजन नायक, एक मेहनती किसान, जिनके पास 3 एकड़ जमीन है। ग्रेजुएट होने के बावजूद रंजन ने खेती को ही अपनी आजीविका बनाया, क्योंकि उनका मानना है कि ज़िंदगी की असली जड़ें इसी मिट्टी में हैं।
शुरुआत संघर्षों से भरे सपने
रंजन अपनी जमीन पर मूंग और धान की खेती करते थे। वह 1 एकड़ में मूंग और 2 एकड़ में धान उगाते, लेकिन उनकी आमदनी परिवार की ज़रूरतें पूरी करने के लिए कम पड़ जाती थी। उनकी पत्नी और तीन बच्चों की जिम्मेदारी के बीच आर्थिक संकट लगातार बढ़ रहा था।
इसी वजह से रंजन ने एक बड़ा फैसला लिया उन्होंने टमाटर की खेती शुरू करने का निर्णय लिया, क्योंकि यह फसल कम समय में अधिक लाभ दिला सकती थी।
चुनौतियाँ किस्मत का कठोर इम्तिहान
यह फैसला आसान नहीं था।
- खेत के लिए सिंचाई का कोई स्थायी साधन नहीं था
- मोटर पंप के ऊंचे किराए उन्हें परेशान करते थे
- मौसम का भरोसा तो जैसे रंजन की परीक्षा लेता था
- और ऊपर से सांड व हिरण फसलों को नुकसान पहुँचाते
फिर भी रंजन आगे बढ़ते रहे…
लेकिन 20 दिन की मेहनत के बाद सांडों ने उनकी पूरी टमाटर फसल तबाह कर दी।
वो दिन रंजन के लिए सबसे भारी था आर्थिक नुकसान के साथ उनका मनोबल भी टूट चुका था।
उम्मीद की किरण Prayatn Sanstha और HDFC Bank Parivartan
जब हालात बेहद कठिन थे, तभी सहारा बना Prayatn Sanstha और HDFC Bank Parivartan का Holistic Rural Development Project
रंजन की लगन और सीखने की इच्छा को देखकर उन्हें इस प्रोजेक्ट में शामिल किया गया।
यहाँ उन्हें मिला:
- टमाटर के उच्च गुणवत्ता वाले बीज
- ऑर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग
- जैविक कीटनाशक और खाद उपयोग करने का तरीका
- पौधों की उचित दूरी रखने की तकनीक
- फेंसिंग करने की सलाह ताकि पशु नुकसान न पहुँचाएँ
मेहनत का फल सफलता की लाल चमक
रंजन ने 0.5 एकड़ में 4000 पौधे लगाए
पूरी तरह ऑर्गेनिक तकनीकों से खेती की
और नतीजा- 30 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले टमाटर
लगभग ₹90,000 की कमाई
जो पहले मुश्किल लगता था वह आज उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि बन गया!
प्रेरणा से उद्यमिता तक
अब रंजन सिर्फ किसान नहीं एक सफल कृषि-उद्यमी हैं।
वह जल्द ही किसी Farmers Producer Company से जुड़कर सीधे बाजार में बिक्री करना चाहते हैं, जिससे और अधिक लाभ मिले। साथ ही वे अपने गाँव के किसानों को भी अपने अनुभव से सशक्त बनाना चाहते हैं क्योंकि उनकी सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे कबीराजपुर की जीत है!
निष्कर्ष
रंजन नायक की कहानी बताती है कि अगर सही मार्गदर्शन, तकनीक और अवसर मिल जाए, तो एक सामान्य किसान भी असाधारण बदलाव ला सकता है। Prayatn Sanstha और HDFC Bank Parivartan के प्रयासों ने न सिर्फ रंजन की आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि उनकी सोच और गाँव की उम्मीदों को एक नया रूप दिया।
